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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

आचार्य विश्वनाथ

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thumb|150px|right|साहित्य दर्पण का अंग्रेज़ी रूपांतरआचार्य विश्वनाथ (पूरा नाम आचार्य विश्वनाथ महापात्र) संस्कृत काव्य शास्त्र के मर्मज्ञ और आचार्य थे। वे साहित्य दर्पण सहित अनेक साहित्यसम्बन्धी संस्कृत ग्रन्थों के रचयिता हैं। उन्होंने आचार्य मम्मट के ग्रंथ काव्य प्रकाश की टीका भी की है जिसका नाम "काव्यप्रकाश दर्पण" है। जीवन चरित साहित्य दर्पण के प्रथम परिच्छेद की पुष्पिका में उन्होंने जो विवरण दिया है उसके आधार पर उनके पिता का नाम चंद्रशेखर और पितामह का नाम नारायणदास था। महापात्र उनकी उपाधि थी। वे कलिंग के रहने वाले थे। उन्होंने अपने को "सांधिविग्रहिक," "अष्टादशभाषावारविलासिनीभुजंग" कहा है पर किसी राजा के राज्य का नामोल्लेख नहीं किया है। साहित्य दर्पण के चतुर्थ परिच्छेद में अलाउद्दीन खिलजी का उल्लेख पाए जाने से ग्रंथकार का समय अलाउद्दीन के बाद या समान संभावित है। जंबू की हस्तलिखित पुस्तकों की सूची में साहित्य दर्पण की एक हस्तलिखित प्रति का उल्लेख मिलता है, जिसका लेखन काल १३८४ ई. है, अत: साहित्य दर्पण के रचयिता का समय १४वीं शताब्दी ठहरता है। कृतियाँ एवं महत्त्व रस को साहित्य की आत्मा मानने वाले वे पहले संस्कृत आचार्य थे। साहित्य दर्पण में उनका सूत्र वाक्य रसात्मकं वाक्यं काव्यम् आज भी साहित्य का मूल माना जाता है और बार बार उद्धृत किया जाता है।http://www.sahityashilpi.com/2009/04/blog-post.html?showComment=1238553900000 मथ साहित्य समुद्र को [काव्य का रचना शास्त्र - 4] - आचार्य संजीव वर्मा सलिल ९ अप्रैल २००९ एचएमटीएल साहित्य शिल्पी https://web.archive.org/web/20141108183327/http://www.sahityashilpi.com/2009/04/blog-post.html?showComment=1238553900000 8 नवंबर 2014 dead साहित्य में रस की स्थापना करने वाले उनके इस दर्शन को विश्वव्यापी ख्याति मिली और इस ग्रंथ का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ।http://www.exoticindiaart.com/book/details/IDE325/ द साहित्य दर्पण मिरर ऑफ कंपोज़ीशन ९ अप्रैल २००९ एग्ज़ोटिक इंडिया आर्ट अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20090622121226/http://www.exoticindiaart.com/book/details/IDE325/ 22 जून 2009 dead साहित्य दर्पण और काव्य प्रकाश की टीका के अतिरिक्त विश्वनाथ द्वारा अनेक काव्यों की भी रचना भी की गई है जिनका पता साहित्य दर्पण और काव्यप्रकाश दर्पण से लगता है। "राघव विलास", संस्कृत महाकाव्य, "कुवलयाश्वचरित्", प्राकृत भाषाबद्ध काव्य, "नरसिंहविजय" संस्कृत काव्य; "प्रभावतीपरिणय" और "चंद्रकला" नाटिका तथा "प्रशस्ति रत्नावली" जो सोलह भाषाओं में रचित करंभक है, का उल्लेख इन्होंने स्वयं किया है और उनके उदाहरण भी आवश्यकतानुसार दिए हैं जिनसे साहित्य दर्पणकार की बहुभाषाविज्ञता और प्रगल्भ पांडित्य की अभिव्यक्ति होती है। सन्दर्भ बाह्यसूत्र विकिबुक्स पर साहित्य दर्पण श्रेणी:संस्कृत आचार्य श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना