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सुइयाब
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350px|अंगूठाकार|तुर्गेश खागानात के समय सुइयाब की स्थिति सुइयाब (अंग्रेजी: Suyab; फारसी: سوی آب; चीनी: 碎葉 / 碎叶; पिनयिन: Suìyè) मध्य एशिया का एक ऐतिहासिक नगर था, जिसे 'ओर्दुकेंत' के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में इसकी पहचान किर्गिस्तान के 'अक-बेशिम' पुरातात्त्विक स्थल से की जाती है। यह नगर चुई नदी की घाटी में स्थित था और रेशम मार्ग (सिल्क रोड) के प्रमुख पड़ावों में से एक था। बिस्केक से लगभग 50 किलोमीटर पूर्व और तोकमोक से 8 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में इस नगर के अवशेष स्थित हैं। वर्ष 2014 में सुइयाब को 'सिल्क रोड्स: चांगआन-तियानशान कॉरिडोर' के हिस्से के रूप में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।"The City of Suyab (Site of Ak-Beshim) introduction" https://web.archive.org/web/20250221044908/http://www.silkroads.org.cn/portal.php?mod=view&aid=1018 21 फ़रवरी 2025 www.silkroads.org.cn अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर 2025
इतिहास
सुइयाब की शुरुआती बसावट 5वीं-6वीं शताब्दी के दौरान सोघदियाई व्यापारियों द्वारा की गई थी। नगर का नाम सुइयाब नदी से लिया गया है, जो फारसी मूल का शब्द है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने 629 ईस्वी में अपनी यात्रा के दौरान इस क्षेत्र का भ्रमण किया था। उन्होंने सुइयाब के आकार, जनसंख्या, कृषि, वस्त्र उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों का विस्तृत विवरण दिया है।
7वीं शताब्दी में तुर्क शासक 'तोंग याबघु क़ाग़ान' के शासनकाल में सुइयाब पश्चिमी तुर्क क़ाग़ानात की मुख्य राजधानी बना। इस काल में नगर में सोघदियाई व्यापारियों और तुर्क सेना के बीच एक मजबूत व्यावसायिक और सैन्य तालमेल देखने को मिलता है। पश्चिमी तुर्क क़ाग़ानात के पतन के बाद, सुइयाब 648 से 719 ईस्वी के बीच तांग साम्राज्य की एक महत्वपूर्ण सैन्य चौकी रहा। यहाँ 679 ईस्वी में तांग किलेबंदी का निर्माण हुआ, जिसके साथ ही क्षेत्र में बौद्ध धर्म का प्रसार भी बढ़ा। कुछ चीनी स्रोतों के अनुसार, प्रसिद्ध कवि ली बाई का जन्म भी सुइयाब में हुआ माना जाता है।"Silk Road Research" silkroadresearch.blog अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर 2025
719 ईस्वी में तांग शासकों ने सुइयाब का नियंत्रण तुर्क शासक 'सुलु' को सौंप दिया, किंतु 738 ईस्वी के बाद चीनी सेना ने पुनः इस पर अधिकार कर लिया। 8वीं शताब्दी में तिब्बती सेनाओं और तांग साम्राज्य के संघर्ष के दौरान यह नगर एक महत्वपूर्ण रक्षा केंद्र बना रहा। अंततः 766 ईस्वी में करलुक शासकों ने इस नगर पर कब्जा कर लिया।"THE POWER CONFIGURATIONS OF THE CENTRAL CIVILIZATION/WORLD SYSTEM IN THE EIGHTH CENTURY" cyberleninka.ru अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर 2025
9वीं और 10वीं शताब्दी के ऐतिहासिक विवरण सीमित हैं, लेकिन 'हुदुद अल-आलम' (983 ईस्वी) में सुइयाब को लगभग 20,000 की जनसंख्या वाला एक समृद्ध नगर बताया गया है। 11वीं शताब्दी की शुरुआत में सुइयाब के स्थान पर 'बलासागुन' प्रमुख नगर के रूप में उभरा और सुइयाब धीरे-धीरे निर्जन हो गया।"Ak-Beshim settlement" kyrgyzguides.com अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर 2025
पुरातात्त्विक स्थल
अक-बेशिम के अवशेषों को 19वीं शताब्दी के अंत में भूलवश बलासागुन समझ लिया गया था, लेकिन 1950 के दशक में हुए उत्खनन से यह सिद्ध हुआ कि यह स्थल सुइयाब था और इसे 11वीं शताब्दी से पहले ही त्याग दिया गया था। सुइयाब का पुरातात्त्विक स्थल लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और यह नगर के बहु-सांस्कृतिक चरित्र का प्रमाण देता है।"Kyrgyzstan and China to jointly protect ruins of ancient Ak-Beshim settlement" 24.kg अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर 2025
यहाँ चीनी किलेबंदी, बौद्ध मंदिर, नेस्टोरियन ईसाई चर्च, सोघद-उइग़ुर लिपि वाले शिलालेख, ज़ोरोस्ट्रियन अस्थि-कलश और तुर्क कब्र-चिह्न (बलबाल) के अवशेष मिले हैं। बौद्ध मूर्तियों, स्तूपों और मंदिरों के अवशेष इस नगर की सांस्कृतिक आदान-प्रदान की कहानी बयां करते हैं। 7वीं शताब्दी के ईसाई चर्च और 10वीं शताब्दी के मठ सुइयाब की धार्मिक विविधता को दर्शाते हैं।"Archaeological excavation of a medieval city and presumed Nestorian Christian graveyard" www.exploration-eurasia.com अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर 2025
सन्दर्भ
श्रेणी:किर्गिस्तान के ऐतिहासिक शहर श्रेणी:मध्य एशिया का इतिहास श्रेणी:रेशम मार्ग