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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

चैती देवी मन्दिर, काशीपुर

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Mata Bala Sundari temple, Kashipur, Uttarakhand 9.jpg माता बालासुन्दरी मन्दिर चैती देवी मन्दिर मुगल काल बालासुन्दरी माता हिन्दू धर्म हिन्दू वास्तुकला एवं मुगल शैली काशीपुर, उत्तराखण्ड मुगल सम्राट औरंगजेब चैती देवी मन्दिर (जिसे माता बालासुन्दरी मन्दिर भी कहा जाता है) उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में काशीपुर कस्बेे में कुँडेश्वरी मार्ग पर स्थित है। यह स्थान महाभारत से भी सम्बन्धित रहा है और इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है। यहां प्रतिवर्ष चैत्र मास की नवरात्रि में चैती मेला (जिसे चैती का मेला भी कहा जाता है) का आयोजन किया जाता है। यह धार्मिक एवं पौराणिक रूप से ऐतिहासिक स्थान है और पौराणिक काल में इसे गोविषाण नाम से जाना जाता था। http://tdil.mit.gov.in:80/CoilNet/IGNCA/utrn0031.htm चैती मेला - काशीपुर २००३ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र २७ -०९-२०१० https://web.archive.org/web/20100927051520/http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/utrn0031.htm 27 सितंबर 2010 dead मेले के अवसर पर दूर-दूर से यहाँ श्रद्धालु आते हैं। माता बाला सुंदरी का अन्य प्रसिद्ध मंदिर माता भगवती बाला सुंदरी का एक प्रसिद्ध मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के नाहन मुख्यालय से लगभग 12 किमी की दूरी पर त्रिलोकपुर नामक स्थान पर है यहाँ मंदिर से तीन किमी दूर पूर्व मे पहाड़ पर ललिता देवी और 10 किमी उत्तर की और त्रिभवानी देवी के भव्य मंदिर है यहाँ माता का मंदिर दोनों मंदिरों के मध्य मे स्थित है कहा जाता है सोलहवी शताब्दी मे माता बाला सुंदरी सहारनपुर के देवबन्द नामक स्थान से त्रिलोकपुर आई थी देवबन्द मे भी माता बाला सुंदरी का भव्य मंदिर है इसके अलावा जम्मू के कठुआ मे भी शिवालिक पर्वत पर देवी का स्थान है मन्दिर इस स्थान पर भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से माता सती के अंगों को काट दिये जाने के बाद माता की दायीं भुजा यहां गिरी थी। तभी यहां माता की कोई मूर्ति नहीं बल्कि एक शिला पर उनकी दायीं भुजा की आकृति गढी हुई है, उसी की पूजा की जाती है।http://www.merapahad.com/bal-sundari-temple-kashipur/ मां बाल सुंदरी मन्दिर, काशीपुर १७-०३-२०१० मेरा पहाड https://web.archive.org/web/20180414234143/http://www.merapahad.com/bal-sundari-temple-kashipur/ 14 अप्रैल 2018 dead बालासुन्दरी के अलावा यहाँ शिव मंदिर, भगवती ललिता मंदिर, बृजपुर वाली देवी के मंदिर, भैरव व काली के मंदिर भी हैं। माँ बालासुन्दरी का एक स्थाई मंदिर पक्काकोट मोहल्ले में अग्निहोत्री ब्राह्मणों के क्षेत्र में स्थित है। इन ब्राह्मण परिवारों को स्थानीय चंदराजाओं से यह भूमि दानस्वरूप प्राप्त हुई थी। बाद में इस भूमि पर बालासुन्दरी देवी का मन्दिर स्थापित किया गया । बालासुन्दरी की प्रतिमा स्वर्णनिर्मित बताई जाती है। मेला काशीपुर का चैती मेलाशाक्त सम्प्रदाय से सम्बन्धित अधिकांश मंदिरों में नवरात्रि में मेले लगते हैं, वैसे ही माँ बालासुन्दरी के इस मन्दिर में भी नवरात्रि में अष्टमी, नवमी व दशमी के दिन यहाँ श्रद्धालुओं का तो समुह ही उमड़ पड़ता है। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ तरह-तरह की दुकानें भी मेले में लगती हैं। यहां देवी महाकाली के मंदिर में बलि भी चढाई जाती थी। अन्त में दशमी की रात्रि को बालासुन्दरी की डोली में बालासुन्दरी की सवारी अपने स्थाई भवन काशीपुर के लिए प्रस्थान करती है। प्राय: चैती मेले में पूरी ऊर्जा काशीपुर से डोला चैती मेला स्थान पर पहुँचने पर ही आती है। डोले में प्रतिमा को रखने से पूर्व अर्धरात्रि में पूजन होता है तथा बकरों का बलिदान भी किया जाता है। डोले को स्थान-स्थान पर श्रद्धालु रोककर पूजन अर्चन करते और भगवती को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते है। मेले का समापन इसके बाद ही होता है। जनविश्वास के अनुसार इन दिनों जो भी मनौती माँगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। मान्यताएं बाएँ|अंगूठाकार|320x320पिक्सेल|मन्दिर परिसर स्थित खोखला पाकड वृक्ष। लोक मान्यतानुसार जो लोग इस मन्दिर के वर्तमान पण्डे हैं, उनके पूर्वज मुगलों के समय में यहाँ आये थे और उन्होंने ही इस स्थान पर माँ बालासुन्दरी के इस मन्दिर की स्थापना की। तत्कालीन मुगल सम्राट औरंगजेब ने भी इस मंदिर को बनाने में सहायता दी थी। इस मंदिर परिसर में एक पाकड़ का पेड़ स्थित है। इसका तना और पतली टहनी तक सब खोखला है। स्थानीय पंडा पेड़ के संबंध में मान्यता बताते हैं कि एक बार एक महात्मा आए उन्होंने मंदिर के पुजारी पंडा को शक्ति दिखाने को कहा तो पंडा ने कदंब के पेड़ पर पानी का छींटा मारा तो पेड़ फ़ौरन सूख गया। तब उन्होंने फिर उसे हरा करने को कहा तो पंडा ने पेड़ हरा कर दिया, लेकिन पेड़ खोखला रह गया। https://www.amarujala.com/uttarakhand/udham-singh-nagar/chaiti-mela-kashipur भगवती बाल सुंदरी का डोला पहुंचा चैती मंदिर ५ अप्रैल २०१७ अ.उ.ब्यूरो अमर उजाला https://web.archive.org/web/20180415063447/https://www.amarujala.com/uttarakhand/udham-singh-nagar/chaiti-mela-kashipur 15 अप्रैल 2018 live   यह पेड आज भी यहां दिखाई देता है। चित्र दीर्घा स्थानीय थारु जाति के लोगों की इस देवी पर बहुत आस्था है और थारुओं के नवविवाहित जोड़े माँ से आशीर्वाद लेने चैती मेले में जरुर अवश्य पहुँचते हैं। सन्दर्भ बाहरी सूत्र श्रेणी:काशीपुर श्रेणी:उत्तराखण्ड में हिन्दू मन्दिर श्रेणी:शक्ति पीठ