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श्री पुंटिला और उनका नौकर मत्ती
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श्री पुंटिला और उनका नौकर मत्ती (जर्मन: Herr Puntila und sein Knecht Matti) जर्मन नाटककार बर्टोल्ट ब्रेख्त द्वारा लिखा गया नाटक है। इसकी रचना 1940–1941 के बीच हुई और इसका पहला मंचन 5 जून 1948 को ज़्यूरिख में हुआ।
रचना का इतिहास
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्टोल्ट ब्रेख्त निर्वासन में फ़िनलैंड में रह रहे थे। वे फ़िनलैंड की लेखिका हेला वुओलिजोकी के मार्ले़बैक (Marlebäck) स्थित निवास में रहे, जो हेलसिंकी के निकट था। वुओलिजोकी ने ब्रेख्त को इस नाटक के निर्माण में सहायता की। नाटक की सामग्री उनके द्वारा सुनाई गई कहानियों और तैयार किए गए प्रारंभिक मसौदे पर आधारित थी।
यह नाटक फ़िनलैंड के एक ज़मींदार पुंटिला के बारे में है, जिसका व्यवहार इस बात के अनुसार बदलता है कि वह नशे में है या होश में। नशे की अवस्था में वह दयालु और उदार होता है, लेकिन होश में वह कठोर और स्वार्थी बन जाता है।
कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, हेला वुओलिजोकी को पुंटिला के चरित्र के निर्माण में हाउहो क्षेत्र के फ़िनिश किसान Roope Juntula और उनके जुंतुला खेत से परिचय का भी प्रभाव मिला हो सकता है।
कथानक
पुंटिला एक धनी ज़मींदार है जो अपनी बेटी ईवा का विवाह एक राजनयिक से करना चाहता है। लेकिन जब वह नशे में होता है, तो वह सोचता है कि ईवा उसके चालक और नौकर मत्ती से भी विवाह कर सकती है।
मत्ती समझ जाता है कि मालिक और नौकर की दुनिया एक-दूसरे से बहुत अलग है। अंत में वह पुंटिला की हवेली छोड़ देता है।
संदर्भ
Jan Knopf: Brecht-Handbuch।
Erkki Wuolijoki: Niskavuoren henki – Viljapelloilta valkokankaalle. Karisto, 2015.