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कैसरगंज

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कैसरगंज Kaiserganj कैसरगंज India Uttar Pradesh 27.251 81.546 inline, title उत्तर प्रदेश में स्थिति देश राज्य उत्तर प्रदेश ज़िला बहराइच ज़िला तहसील 2011 भाषाएँ प्रचलित हिन्दी भामस +5:30 पिनकोड 271903 दूरभाष कोड 05251 यूपी-40 कैसरगंज (Kaiserganj) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच ज़िले में स्थित एक बस्ती है। यह वर्तमान में नगर पंचायत भी है। यह इसी नाम की तहसील में स्थित है और कैसरगंज लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र का भाग है जहां से वर्तमान में करण भूषण सिंह लोकसभा सदस्य हैं। पूर्व में बृज भूषण शरण सिंह,बेनी प्रसाद वर्मा यहाँ से लोक सभा सदस्य रह चुके हैं। प्रसिद्ध जिलाधिकारी के के नायर भी जनसंघ के टिकट पर यहाँ से चौथी लोकसभा के लिए चुने गए थे। के के नायर का राम मंदिर आंदोलन में प्रमुख स्थान है।"Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716"Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC 23 अप्रैल 2017," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975 जनसांख्यिकी भारत की 2011 जनगणना के अनुसार बहराइच ज़िले के कैसरगंज तहसील की कुल जनसंख्या 8,24,786 है। इनमें से 4,35,798 पुरुष हैं जबकि 3,88,988 महिलाएँ हैं। 2011 में कैसरगंज कस्बे में कुल 1,38,190 परिवार रहते थे। कुल जनसंख्या में से 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 1,56,180 है जोकि कुल जनसंख्या का 19% है। घनत्व 779 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी। 97.7% आबादी ग्रामीण है। साक्षरता: साक्षरता दर 49.81% (पुरुष: 59.1%, महिला: 39.31%) है, जो राज्य औसत (67.68%) से कम है। गाँव और परिवार: 438 गाँव और 1,38,190 परिवार हैं। समुदाय: हिंदू और मुस्लिम मुख्य हैं, साथ ही अनुसूचित जातियाँ और जनजातियाँ। भाषाएँ: अवधी प्रमुख बोली है; हिंदी और उर्दू आधिकारिक हैं। इतिहास प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास कैसरगंज अवध क्षेत्र का हिस्सा है, जिसका इतिहास प्राचीन काल में बौद्ध धर्म से जुड़ा है। श्रावस्ती (58 किमी दूर) में भगवान बुद्ध ने कई वर्ष बिताए, और वहाँ के जेतवन मठ और अनाथपिंडिका स्तूप इस क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाते हैं।मध्यकाल में, कैसरगंज मुगल साम्राज्य और अवध के नवाबों के अधीन था। "कैसर" शब्द फारसी/उर्दू से लिया गया है, जिसका अर्थ "सम्राट" है। यह नाम संभवतः किसी स्थानीय शासक, जमींदार या मुगल प्रशासक से प्रेरित है, जिसने यहाँ बाजार या बस्ती स्थापित की। "गंज" शब्द व्यापारिक केंद्र को दर्शाता है। ब्रिटिश काल 1856 में अवध के ब्रिटिश विलय के बाद, कैसरगंज बहराइच जिले का प्रशासनिक केंद्र बना। ब्रिटिश रिकॉर्ड इसे तहसील और बाजार कस्बे के रूप में वर्णित करते हैं। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में इस क्षेत्र में कुछ गतिविधियाँ हुईं, लेकिन कैसरगंज का विशेष उल्लेख कम है। आधुनिक इतिहास 20वीं सदी में, कैसरगंज एक महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र बन गया, जिसे ग्रामीण विकास के लिए कार्य करने वाले नेताओं ने प्रतिनिधित्व किया। भूगोल कैसरगंज बहराइच जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 927 पर स्थित है, जो लखनऊ से 86 किमी, अयोध्या से 91 किमी, और श्रावस्ती से 58 किमी दूर है। यह घाघरा नदी के पास 112 मीटर की ऊँचाई पर है। जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जिसमें गर्मियाँ (40–45 डिग्री सेल्सियस), सर्दियाँ (5–15 डिग्री सेल्सियस), और भारी मानसूनी बारिश होती है। तहसील का क्षेत्रफल 1,059.4 वर्ग किमी है (1,056.4 वर्ग किमी ग्रामीण, 3 वर्ग किमी शहरी)। घाघरा नदी खेती को समर्थन देती है। परसेंडी चीनी मिल, परसेंडी गाँव के पास, गन्ना प्रसंस्करण करती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देती है। आसपास के कस्बे कैसरगंज के पास कई कस्बे हैं। जरवल: 10 किमी दूर, सूफी दरगाह और बाजार के लिए जाना जाता है। फखरपुर: 20 किमी दूर, कृषि व्यापार का केंद्र। वजीरगंज बाजार: गजोधरपुर और नंदवल के पास, बहराइच जिले में, 16 किमी दूर, ग्रामीण व्यापार के लिए जाना जाता है। गजोधरपुर: 15 किमी दूर, ग्रामीण सेवाएँ प्रदान करता है। आवागमन कैसरगंज बहराइच शहर से 40 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग 927 हाइवे पर स्थित है। संस्कृति कैसरगंज अवध की गंगा-जमुनी तहज़ीब को दर्शाता है। यह ग्रामीण सादगी और सामुदायिक एकता के लिए जाना जाता है। त्योहार: होली, दीवाली, ईद, और मुहर्रम धूमधाम से मनाए जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा मेला लोकप्रिय है। खानपान: अवधी व्यंजन जैसे कबाब, बिरयानी, तहरी, और मिठाइयाँ (शाही टुकड़ा, मालपुआ) प्रचलित हैं। ग्रामीण भोजन में दाल, चावल, रोटी शामिल हैं। हस्तशिल्प: स्थानीय हस्तशिल्प मौजूद हैं, हालाँकि चिकनकारी लखनऊ में अधिक है। अर्थव्यवस्था कैसरगंज की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। घाघरा नदी गेहूँ, धान, गन्ना, दालें, और सरसों की खेती को समर्थन देती है। परसेंडी चीनी मिल गन्ना प्रसंस्करण करती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, 86,573 लोग खेती और 58,430 लोग मजदूरी करते हैं। कस्बा एक स्थानीय बाजार है, जो बहराइच और लखनऊ से जुड़ा है। पशुपालन और छोटे व्यापार आय के स्रोत हैं। कम साक्षरता और बुनियादी ढाँचे की कमी, चुनौतियाँ हैं। राजनीति कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र में पाँच विधानसभा खंड हैं: पयागपुर, कैसरगंज, कटरा बाजार, कर्नलगंज, और तरबगंज। यह भाजपा का गढ़ है। प्रमुख प्रतिनिधि शकुंतला नायर (जनसंघ): 1952, 1967, और 1971 में सांसद चुनी गईं। बेनी प्रसाद वर्मा (समाजवादी पार्टी, कांग्रेस): कई बार जीते: 1996: सपा से जीते, भाजपा के विनय कुमार पांडेय को हराया। 1998: सपा से जीते, भाजपा के राम तेज यादव को हराया। 2009: कांग्रेस से जीते, भाजपा के बृज भूषण शरण सिंह को हराया। वर्मा का कुर्मी समुदाय में प्रभाव था, और उन्होंने केंद्रीय इस्पात और सामाजिक न्याय मंत्री के रूप में सेवा की। बृज भूषण शरण सिंह: विभिन्न दलों से जीते: 1991: भाजपा से जीते, कांग्रेस के मकसूद अहमद को हराया। 1999: भाजपा से जीते, सपा के राज करन यादव को हराया। 2004: सपा से जीते, भाजपा के अरिफ मोहम्मद खान को हराया। 2014, 2019: भाजपा से जीते, सपा की कृष्णा देवी और भानु प्रताप सिंह को हराया। सिंह का थाकुर समुदाय में प्रभाव रहा, और वे कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष थे। करण भूषण सिंह (भाजपा): 2024 में 5,71,263 वोटों से जीते, सपा के भगत राम को हराया। मई 2024 में उनके काफिले की दुर्घटना में दो लोगों की मृत्यु हुई। इन्हें भी देखें बहराइच ज़िला फखरपुर जरवल रुपईडीहा चक इमामगंज महराजगंज बाज़ार पयागपुर रिसिया बाज़ार सन्दर्भ श्रेणी:बहराइच ज़िला श्रेणी:उत्तर प्रदेश के गाँव श्रेणी:बहराइच ज़िले के गाँव श्रेणी:बहराइच ज़िले के नगर श्रेणी:कस्बा