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तमस (उपन्यास)
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तमस तमस.jpg 100px तमस का मुखपृष्ठ भीष्म साहनी राजकमल प्रकाशन, दिल्ली हिंदी भारत सांप्रदायिक वैमनस्य यथार्थपरक उपन्यास २५३ 81-267-0543-4 भीष्म साहनी की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक जिसपर फ़िल्म भी बनी।
तमस भीष्म साहनी का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1973 में हुआ था। वे इस उपन्यास से साहित्य जगत में बहुत लोकप्रिय हुए थे। तमस को 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। http://www.bbc.co.uk/hindi/southasia/030711_bhishm_died_mk.shtml भीष्म साहनी का अंतिम संस्कार ३० अक्तूबर २००८ पीएचपी बीबीसी https://web.archive.org/web/20040820034156/http://www0.bbc.co.uk/hindi/southasia/030711_bhishm_died_mk.shtml 20 अगस्त 2004 live इस पर 1986 में गोविंद निहलानी ने दूरदर्शन धारावाहिक तथा एक फ़िल्म भी बनाई थी। http://hindi.webdunia.com/entertainment/film/gossip/0801/02/1080102023_1.htm गोविंद निहलानी एनिमेशन के मैदान में ३० अक्तूबर २००८ एचटीएम वेबदुनिया https://web.archive.org/web/20080307084730/http://hindi.webdunia.com/entertainment/film/gossip/0801/02/1080102023_1.htm 7 मार्च 2008 dead
कथावस्तु
'तमस' की कथा परिधि में अप्रैल 1947 के समय में पंजाब के जिले को परिवेश के रूप में लिया गया है। 'तमस' कुल पांच दिनों की कहानी को लेकर बुना गया उपन्यास है। परंतु कथा में जो प्रसंग संदर्भ और निष्कर्ष उभरते हैं, उससे यह पांच दिवस की कथा न होकर बीसवीं सदी के हिंदुस्तान के अब तक के लगभग सौ वर्षों की कथा हो जाती है।
यों संपूर्ण कथावस्तु दो खंडों में विभाजित है। पहले खंड में कुल तेरह प्रकरण हैं। दूसरा खंड गांव पर केंद्रित है। 'तमस' उपन्यास का रचनात्मक संगठन कलात्मक संधान की दृष्टि से प्रशंसनीय है। इसमें प्रयुक्त संवाद और नाटकीय तत्व प्रभावकारी हैं। भाषा हिन्दी, उर्दू, पंजाबी एवं अंग्रेजी के मिश्रित रूप वाली है। भाषायी अनुशासन कथ्य के प्रभाव को गहराता है। साथ ही कथ्य के अनुरूप वर्णनात्मक, मनोविशेषणात्मक एवं विशेषणात्मक शैली का प्रयोग सर्जक के शिल्प कौशल को उजागर करता है। http://www.taptilok.com/pages/details.php?cat_sl_no=0&detail_sl_no=13 भीष्म साहनी का तमस ३० अक्तूबर २००८ पीएचपी ताप्तीलोक दिसंबर 2021 InternetArchiveBot
पात्र
नत्थू
बख्शीजी
अज़ीज़
मास्टर रामदास
मेहता
अजीतसिंह
देसराज
शकर
कश्मीरीलाल
जरनैल
देवदत्त
लीज़ा
रिचर्ड
हकीमजी
सरदारजी
मौला दाद
हयातबख्श
लक्ष्मीनारायण
विशेषताएँ
आजादी के ठीक पहले सांप्रदायिकता की बैसाखियाँ लगाकर पाशविकता का जो नंगा नाच इस देश में नाचा गया था, उसका अंतरग चित्रण भीष्म साहनी ने इस उपन्यास में किया है। काल-विस्तार की दृष्टि से यह केवल पाँच दिनों की कहानी होने के बावजूद इसे लेखक ने इस खूबी के साथ चुना है कि सांप्रदायिकता का हर पहलू तार-तार उदघाटित हो जाता है और पाठक सारा उपन्यास एक साँस में पढ़ जाने के लिए विवश हो जाता है। भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या एक युग पुरानी है और इसके दानवी पंजों से अभी तक इस देश की मुक्ति नहीं हुई है। आजादी से पहले विदेशी शासकों ने यहाँ की जमीन पर अपने पाँव मजबूत करने के लिए इस समस्या को हथकंडा बनाया था और आजादी के बाद हमारे देश के कुछ राजनीतिक दल इसका घृणित उपयोग कर रहे हैं। और इस सारी प्रक्रिया में जो तबाही हुई है उसका शिकार बनते रहे हैं वे निर्दोष और गरीब लोग जो न हिन्दू हैं, न मुसलमान बल्कि सिर्फ इन्सान हैं और हैं भारतीय नागरिक। भीष्म साहनी ने आजादी से पहले हुए साम्प्रदायिक दंगों को आधार बनाकर इस समस्या का सूक्ष्म विश्लेषण किया है और उन मनोवृत्तियों को उघाड़कर सामने रखा है जो अपनी विकृतियों का परिणाम जनसाधारण को भोगने के लिए विवश करती हैं। http://www.pustak.org/bs/home.php?bookid=2861 तमस ३० अक्तूबर २००८ पीएचपी भारतीय साहित्य संग्रह https://web.archive.org/web/20100827120027/http://pustak.org/bs/home.php?bookid=2861 27 अगस्त 2010 dead
विश्लेषणात्मक मत
गोपाल राय के मतानुसार “तमस उस अन्धकार का द्योतक है जो आदमी की इंसानियत और संवेदना को ढँक लेता है और उसे हैवान बना देता है।”गोपाल राय हिन्दी उपन्यास का इतिहास 2014 राजकमल प्रकाशन नई दिल्ली 978-81-267-1728-6 303
इन्हें भी देखें
झूठा सच
सन्दर्भ
श्रेणी:उपन्यास
श्रेणी:भीष्म साहनी
श्रेणी:भारत के विभाजन पर आधारित साहित्य
श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा की पुस्तकें
श्रेणी:२०वीं सदी का साहित्य