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411 समाचार
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ऑपरेशन आइसब्रिज

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सितंबर 2026 सितंबर 2026 ऑपरेशन आइसब्रिज (Operation IceBridge) नासा (NASA) द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी वायुयान-आधारित अभियान है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य ध्रुवीय बर्फ की चादरों (ice sheets), हिमशैलों (ice shelves), और समुद्री बर्फ (sea ice) में हो रहे परिवर्तनों का अध्ययन करना है। यह अभियान पृथ्वी की जलवायु प्रणाली और समुद्र के स्तर में वृद्धि पर ध्रुवीय बर्फ के प्रभाव को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।https://science.nasa.gov/mission/icebridge/ IceBridge - NASA Science 15 जून 2023 पृष्ठभूमि और उद्देश्य आइससैट-१ उपग्रह का उत्तराधिकारी: ऑपरेशन आइसब्रिज की शुरुआत २००९ में तब हुई जब नासा के आइससैट-१ (ICESat-1) उपग्रह ने कार्य करना बंद कर दिया। आइससैट-१ ने २००३ से २००९ तक ध्रुवीय बर्फ की मोटाई और विस्तार का सफलतापूर्वक मापन किया था। इसके बाद के उपग्रह आइससैट-२ (ICESat-2) के प्रक्षेपण (२०१८) तक के अंतराल को भरने के लिए इस अभियान की शुरुआत की गई। मुख्य उद्देश्य: ध्रुवीय बर्फ की मोटाई, संरचना, और गतिशीलता में परिवर्तनों का निरंतर अवलोकन करना। बर्फ की चादरों के पिघलने और समुद्र के स्तर में योगदान का आकलन करना। ग्लेशियरों और हिमशैलों की स्थिरता का अध्ययन करना। कार्यप्रणाली और प्रौद्योगिकी ऑपरेशन आइसब्रिज उन्नत तकनीकों से लैस विमानों का उपयोग करता है, जो निम्नलिखित उपकरणों से सुसज्जित हैं: लेजर अल्टीमीटर (Laser Altimeters): ये उपकरण विमान से जमीन/बर्फ तक की दूरी का सटीक मापन करते हैं, जिससे बर्फ की सतह की ऊँचाई और मोटाई का पता चलता है। उदाहरण: एयरबोर्न टोपोग्राफिक मैपर (ATM) और लेजर वेजिटेशन सेंसर (LVIS)। रडार प्रणाली (Radar Systems): रडार का उपयोग बर्फ की आंतरिक संरचना और उसके नीचे की चट्टानी सतह (bedrock) का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। उदाहरण: संचयी रडार (Accumulation Radar) और बर्फ-प्रवेशक रडार (Ice-Penetrating Radar)। गुरुत्वाकर्षण मीटर (Gravimeters): ये उपकरण समुद्र तल की गहराई का मापन करने में सहायता करते हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ बर्फ की चादरें समुद्र के संपर्क में आती हैं। क्षेत्र और गतिविधियाँ अवलोकन क्षेत्र: अंटार्कटिका: हर साल अक्टूबर से नवंबर तक अंटार्कटिका का अवलोकन किया जाता है। आर्कटिक: हर साल मार्च से मई तक आर्कटिक क्षेत्र का अवलोकन किया जाता है। अलास्का और अन्य ग्लेशियर युक्त क्षेत्र: समय-समय पर इन क्षेत्रों का भी अवलोकन किया जाता है। विमानों का बेड़ा: इस अभियान में विशेष रूप से तैयार किए गए विमानों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि डीसी-८, पी-३ ओरियन, और गल्फस्ट्रीम-V। महत्वपूर्ण खोजें और योगदान बर्फ की हानि का आकलन: इस अभियान ने ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ की चादरों में तेजी से हो रही हानि का दस्तावेजीकरण किया है। हिमशैलों का पिघलना: अंटार्कटिका की हिमशैलों (जैसे डॉट्सन हिमचट्टान के नीचे गर्म पानी के प्रवाह का पता लगाया गया, जो उनके पिघलने का मुख्य कारण है। समुद्री बर्फ का अध्ययन: आर्कटिक समुद्री बर्फ की मोटाई और सीमा में हो रहे परिवर्तनों का रिकॉर्ड तैयार किया गया। आइससैट-२ के लिए आधार रेखा डेटा: आइससैट-२ उपग्रह के प्रक्षेपण से पहले और बाद में डेटा की तुलना करने के लिए एक मजबूत डेटा सेट तैयार किया गया। वैज्ञानिक और वैश्विक महत्व ऑपरेशन आइसब्रिज ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके डेटा का उपयोग जलवायु मॉडलों को सुधारने और समुद्र के स्तर में वृद्धि के भविष्य के अनुमानों को परिष्कृत करने के लिए किया जाता है। यह अभियान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें कई देशों के वैज्ञानिक और शोध संस्थान शामिल हैं। इन्हें भी देखें आइससैट-२ ध्रुवीय बर्फ की चादरें जलवायु परिवर्तन नासा के भूवैज्ञानिक अभियान संदर्भ NASA's Operation IceBridge Official Website National Snow and Ice Data Center (NSIDC) Journal of Geophysical Research: Earth Surface श्रेणी:नासा