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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

विश्व साहित्य

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विश्व साहित्य से आशय उस समस्त साहित्य से है जिसका प्रसार अपनी स्रोत संस्कृति से बाहर भी विद्यमान हो।https://www.jstor.org/stable/j.ctv301fqn What Is World Literature? Damrosch David 2003 Princeton University Press ऐसा साहित्य उस भाषा में लिखा हुआ मौलिक साहित्य हो सकता है अथवा किसी अन्य भाषा से उस भाषा में अनूदित हो सकता है। विश्व साहित्य की अवधारणा का जन्म एक लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और साहित्यिक आदान-प्रदान एवं अन्तरक्रियात्मकता का परिणाम है। प्राचीनकाल से ही विश्व की विभिन्न सभ्यताओं के बीच व्यापारिक गतिविधियों तथा शासकों द्वारा नए-नए क्षेत्रों में साम्राज्य के विस्तार के कारण साहित्यिक सामग्री के प्रसार के प्रमाण दिखाई देने लगते हैं। इस प्रक्रिया ने औपनिवेशिक काल में गति पकड़ी और उत्तर-औपनिवेशिक दौर में साहित्य के लोकतंत्रीकरण तथा भूमंडलीकरण ने इसके वैश्विक प्रचार-प्रसार को गति प्रदान की। इतिहास विश्व साहित्य विभिन्न देशों के राष्ट्रीय साहित्य के योग से आगे की अवधारणा है। इसके एक अनुशासन के रूप में विकसित होने के प्रारम्भिक अवशेष 19वीं सदी में दिखाई देने लगते हैं। इसका सर्वप्रथम उल्लेख गेटे तथा एकरमैन के संवादों की शृंखला में मिलता है। गेटे ने वर्ष 1827 में अपने शिष्य जोहान पीटर एकरमैन से चर्चा करते हुए 'विश्व साहित्य' (Welt Literatur) पद का उपयोग किया। उनके अनुसार,मुझे इस बात का और भी अधिक यकीन होता जा रहा है कि कविता मानवता की सार्वभौमिक संपत्ति है, जो सैकड़ों लोगों में हर जगह और हर समय स्वयं को प्रकट करती है...राष्ट्रीय साहित्य अब एक अर्थहीन शब्द बन गया है; विश्व साहित्य का युग निकट है और सभी को इसके उद्भव को शीघ्र लाने का प्रयास करना चाहिए।गेटे ऐसे पहले विचारक थे, जिन्होंने विश्व साहित्य की अवधारणा की ओर स्पष्ट रूप से संकेत किया। वर्ष 1847 में गेटे के इस नामकरण को मार्क्स एवं एंगेल्स के कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो में स्वीकार्यता मिली।https://www.marxists.org/archive/marx/works/1848/communist-manifesto/ Manifesto of the Communist Party www.marxists.org 2026-04-05 नए वैश्विक उत्पादन संबंधों को समझते हुए वे उल्लेख करते हैं,राष्ट्रीय एकतरफापन और संकीर्ण मानसिकता का होना उत्तरोत्तर असंभव होता जा रहा है, और असंख्य राष्ट्रीय और स्थानीय साहित्यों से एक विश्व साहित्य का उदय हो रहा है। फ्रिट्ज़ स्ट्रिच अपनी रचना 'Gothe and World Literature' में विश्व साहित्य की अवधारणा में निहित आर्थिक चरित्र को परिभाषित करने का प्रयत्न करते हैं,विभिन्न देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान, एक साहित्यिक बाजार जहां राष्ट्र अपने बौद्धिक खजाने को आदान-प्रदान के लिए लाते हैं।Goethe and World Literature Strich Fritz Routledge and Kegan Paul Ltd. 1949 London 5डेविड डेमरोश अपनी कृति 'What is World Literature' में विश्व साहित्य को परिभाषित करने का प्रयत्न करते हैं।मैं विश्व साहित्य को उन सभी साहित्यिक कृतियों के रूप में देखता हूँ जो अपने मूल संस्कृति से परे, अनुवादित रूप में या अपनी मूल भाषा में प्रसारित होती हैं। इस संदर्भ में रबीन्द्रनाथ टैगोर के मत भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, जो विश्वमानव की बात करते हैं। वर्ष 1907 में तुलनात्मक साहित्य पर दिए एक व्याख्यान में विश्व साहित्य के संबंध में टैगोर कहते हैं, मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि जिस प्रकार संसार केवल तुम्हारे खेत, मेरे खेत और उसके खेत का योग नहीं है, क्योंकि इस प्रकार संसार को जानना केवल एक नासमझ जैसी संकीर्ण सोच से देखना है, उसी प्रकार विश्व साहित्य भी केवल तुम्हारी रचनाओं, मेरी रचनाओं और उसकी रचनाओं का योग नहीं है। हम आम तौर पर साहित्य को इसी सीमित प्रांतीय शैली में देखते हैं। क्षेत्रीय संकीर्णता से खुद को मुक्त करना और विश्व साहित्य में सार्वभौमिक अस्तित्व को देखने का संकल्प लेना, प्रत्येक लेखक की रचना में ऐसी समग्रता को समझना और प्रत्येक व्यक्ति की आत्म-अभिव्यक्ति के साथ इसके अंतर्संबंध को देखना, यही वह उद्देश्य है जिसके प्रति हमें स्वयं को समर्पित करना होगा।Chaudhuri Rosinka Viśvasāhitya: Rabindranath Tagore’s Idea of World Literature 2021 https://www.cambridge.org/core/books/cambridge-history-of-world-literature/visvasahitya-rabindranath-tagores-idea-of-world-literature/FBDF1F7DCD20B76F59D2686B6A4D520F The Cambridge History of World Literature 261–278 Ganguly Debjani Cambridge University Press 978-1-108-55726-9 2026-04-05 गेटे के विचारों के अध्ययन के आधार पर डैमरोश वैश्विक प्रणाली में प्रसारित साहित्य के प्रतिग्रहण का उल्लेख भी करते हैं। जब भी कोई पाठक किसी अपरिचित क्षेत्र के साहित्य का अध्ययन करता है, तो वह तीन आधारों पर उससे प्रभावित होता है। विदेशी साहित्य में कई ऐसे बिन्दु होते हैं, जो व्यक्ति विशेष की परंपरा से नितांत भिन्न हैं। ये साहित्य की नवीनता को अभिव्यक्त करने का कार्य करते हैं। यह साहित्य कई ऐसी प्रवृत्तियों को भी उजागर करता है, जो दोनों संस्कृतियों में एक समान होती हैं। इनसे पाठक आनंदित होता है। कई ऐसे बिन्दु भी होते हैं, जो समानता और विविधता दोनों ही तत्वों को समाहित रखते हैं। इनसे पाठक की धारणाओं और व्यवहार में परिवर्तन आता है। सन्दर्भ इन्हें भी देखें भारतीय साहित्य श्रेणी:साहित्य