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सौदा अभिवाक
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भारतीय संसद ने दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन अधिनियम 2/2006 द्वारा एक नया अध्याय 21 (ए) (धारा 265-ए से 265-एल) प्ली बारगेनिंग नामक शीर्षक जोड़कर दांडिक प्रकरणों को शीघ्रता से निपटाने का एक सराहनीय कदम उठाया है। सौदा अभिवाक अवधारणा के अंतर्गत अभियुक्त, अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपसी सामंजस्य पूर्ण तरीके से प्रकरण के निपटारे हेतु न्यायालय के अनुमोदन से एक रास्ता निकालते हैं। इसके अंतर्गत अभियुक्त द्वारा अपराध स्वीकृति पर उसे हल्के दंड से दंडित किया जाता है, जो अन्यथा कठोर भारी हो सकता है। भारत में सौदा अभिवाक का लाभ गंभीर अपराधों में नहीं उठाया जा सकता है।
ऐसे अपराधों में सौदा अभिवाक लागू नहीं होता, जो मृत्यु दंड, आजीवन कारावास सात वर्ष से अधिक कारावास से दंडनीय होते हैं। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित श्रेणियों के अपराधों को भी सौदा अभिवाक की परिधि से बाहर रखा गया है:-
1. ऐसे अपराध जो देश की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं। केंद्रीय सरकार ने अधिसूचना दिनांक 11 जुलाई 2006 द्वारा 19 अधिनियमों में वर्णित अपराधों को सौदा अभिवाक से अपवर्जित किया है।
2. महिलाओं के विरूद्ध अपराध।
3. 14 वर्ष से कम उम्र के बालक के विरूद्ध।
सौदा अभिवाक् (प्ली बोरगेनिंग) के आवेदन देने के लिए प्रक्रिया -
पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट (चालान) अथवा परिवाद प्रकरण में अभियुक्त सौदा अभिवाक हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। यह आवेदन शपथ पत्र द्वारा समर्थित होना चाहिए। अभियुक्त के आवेदन में यह वर्णित होना चाहिए कि उसने अपराध की प्रकृति को एवं दंड की सीमा को समझ लिया है और स्वेच्छा से आवेदन पेश कर रहा है। यदि अभियुक्त उसी अपराध में पूर्व में दोषसिद्ध हुआ हो तो वह सौदा अभिवाक के लिए अयोग्य होगा।
सन्दर्भ
श्रेणी:अपराध
श्रेणी:विधि
श्रेणी:न्याय